{"product_id":"9789350481462","title":"Vivekanand Ki Atmakatha","description":"\u003cp\u003eस्वामी विवेकानंद नवजागरण के पुरोधा थे। उनका चमत्कृत कर देनेवाला व्यक्‍तित्व, उनकी वाक‍्‍शैली और उनके ज्ञान ने भारतीय अध्यात्म एवं मानव-दर्शन को नए आयाम दिए। मोक्ष की आकांक्षा से गृह-त्याग करनेवाले विवेकानंद ने व्यक्‍तिगत इच्छाओं को तिलांजलि देकर दीन-दुःखी और दरिद्र-नारायण की सेवा का व्रत ले लिया।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eउन्होंने पाखंड और आडंबरों का खंडन कर धर्म की सर्वमान्य व्याख्या प्रस्तुत की। इतना ही नहीं, दीन-हीन और गुलाम भारत को विश्‍वगुरु के सिंहासन पर विराजमान किया।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eऐसे प्रखर तेजस्वी, आध्यात्मिक शिखर पुरुष की जीवन-गाथा उनकी अपनी जुबानी प्रस्तुत की है प्रसिद्ध बँगला लेखक श्री शंकर ने अद‍्भुत प्रवाह और संयोजन के कारण यह आत्मकथा पठनीय तो है ही, प्रेरक और अनुकरणीय भी है।\u003c\/p\u003e","brand":"Sai Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":47645173580068,"sku":"9789358894585","price":400.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0671\/3661\/8788\/files\/71vLNvert4L._SY466.jpg?v=1701088144","url":"https:\/\/bookstation.in\/mr\/products\/9789350481462","provider":"BookStation","version":"1.0","type":"link"}