{"product_id":"9789388183666","title":"चार नाटक","description":"\u003cstyle type=\"text\/css\"\u003e\u003c!--\ntd {border: 1px solid #cccccc;}br {mso-data-placement:same-cell;}\n--\u003e\u003c\/style\u003e \n\u003cspan data-sheets-userformat='{\"2\":14851,\"3\":{\"1\":0},\"4\":{\"1\":2,\"2\":16777215},\"12\":0,\"14\":{\"1\":2,\"2\":987409},\"15\":\"\\\"Amazon Ember\\\", Arial, sans-serif\",\"16\":11}' data-sheets-value=\"{\u0026quot;1\u0026quot;:2,\u0026quot;2\u0026quot;:\u0026quot;'मराठी की रंगपरम्परा बहुत समृद्ध और सजीव रही है और उसका प्रभाव हिन्दी पर भी पड़ा है। मराठी और हिन्दी के बीच रंगमंच और नाटक के क्षेत्र में लगातार आदान-प्रदान होता रहा है। मराठी के प्राय: सभी बड़े आधुनिक नाटककारों के नाटक हिन्दी में अनूदित हुए और अनेक निर्देशकों द्वारा कई शहरों में खेले जाते रहे हैं। श्याम मनोहर के चार नाटक मराठी-हिन्दी के विद्वान् निशिकान्त ठकार द्वारा अनूदित होकर यहाँ पहली बार हिन्दी में प्रकाशित हो रहे हैं। रज़ा पुस्तक माला के अन्र्तगत अन्य भारतीय भाषाओं से अच्छी और प्रासंगिक सामग्री हिन्दी में लाने के हमारे प्रयत्न का यह हिस्सा है।.\u0026quot;,\u0026quot;6\u0026quot;:1}\"\u003e' की रंगपरंपरा खूप समृद्ध आणि सजीव राहिली आहे आणि त्याचा प्रभाव हिंदीवर भीम आहे. मराठी आणि हिंदी के मध्य रंगमंच आणि नाटकाच्या क्षेत्रात सतत आदान-प्रदान होत होते. मराठी के प्राय: सर्व मोठे आधुनिक नाटककारांचे नाटक हिंदीत अनूदित केले जाते आणि अनेक दिग्दर्शकांकडून अनेक शहरांमध्ये खेळले जातात. श्याम मनोहर के चार नाटक मराठी-हिंदी के विद्वान् निशिकान्त ठकार द्वारा अनूदित होकर येथे पहिली बार हिंदी प्रकाशित होत आहेत. रझा पुस्तक माला अन्र्तगत इतर भारतीय विहीर विहीर आणि सामान्य सामग्री हिंदीमध्ये आमच्या प्रयत्नाचा हिस्सा आहे.\u003c\/span\u003e","brand":"Sai Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":45010186469668,"sku":"9789388183666","price":297.5,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0671\/3661\/8788\/products\/43909_front.jpg?v=1680942398","url":"https:\/\/bookstation.in\/mr\/products\/9789388183666","provider":"BookStation","version":"1.0","type":"link"}