{"product_id":"572e074a-3f94-4888-bb0f-ad7d3ce46410","title":"Urdu Ke Mashhoor Shayar Sahir Ludhianvi Aur Unki Chuninda Shayari","description":"\u003cstyle type=\"text\/css\" data-mce-fragment=\"1\"\u003e\u003c!--\ntd {border: 1px solid #cccccc;}br {mso-data-placement:same-cell;}\n--\u003e\u003c\/style\u003e\n\u003cspan data-sheets-value='{\"1\":2,\"2\":\"साहिर लुधियानवी प्रसिद्ध शायर और गीतकार थे। साहिर एक ऐसी शख्सियत हैं, जिन्हें अगर कलम का शहंशाह कहा जाए तो अतिशयोक्ति न होगी। साहित्य जगत में साहिर का नाम है जिनके लिखे गीत आज भी लोगों के होठों पर बढ़-चढ़कर थिरकते हैं क्योंकि उनके शब्दों के मोहपाश से कोई भी खुद को अलग नहीं कर पाता है।\\r\\nहिंदी फिल्मों के लिए लिखे उनके गानों में भी उनका व्यक्तित्व झलकता है। उनके गीतों में संजीदगी कुछ इस तरह झलकती है जैसे ये उनके जीवन से जुड़े हों।\\r\\nवक्त के कागज़ पर अपने जमाने की दास्तान लिखने वाले साहिर ने ताउम्र अपनी तमाम रचनाओं में आधी आबादी के पूरे हक और इज्जत की नुमाइंदगी की। स्त्रियों को लेकर उनकी रचना दृष्टि का फलक बहुत ही व्यापक दिखाई देता है। अपने गानों में कभी वे अपनी महबूबा के जमाल को लफ़्जों से बांधते नजर आते हैं, कभी ‘मेरे घर आई एक नन्ही परी’ लिख कर उस नन्ही बच्ची की सम्मोहक किलकारियां उकेरते हैं तो कभी ‘चकला’ और ‘औरत’ जैसी नज्म में उन औरतों की चीखे ढालते हैं जिन्हें समाज की पिछड़ी निगाहें सिर्फ देह के दायरों में बंधा देखने में अभिशप्त है।\\r\\nदुनिया ने तजुर्बात-ओ-हवादिस की शकल में\\r\\nजो कुछ मुझे दिया है वोह लौटा रहा हूँ मैं\"}' data-sheets-userformat='{\"2\":47619,\"3\":{\"1\":0},\"4\":{\"1\":2,\"2\":16777215},\"12\":0,\"14\":{\"1\":2,\"2\":29061},\"15\":\"Arial\",\"16\":11,\"18\":1}' data-mce-fragment=\"1\"\u003eसाहिर लुधियानवी प्रसिद्ध शायर और गीतकार थे। साहिर एक ऐसी शख्सियत हैं, जिन्हें अगर कलम का शहंशाह कहा जाए तो अतिशयोक्ति न होगी। साहित्य जगत में साहिर का नाम है जिनके लिखे गीत आज भी लोगों के होठों पर बढ़-चढ़कर थिरकते हैं क्योंकि उनके शब्दों के मोहपाश से कोई भी खुद को अलग नहीं कर पाता है। \u003cbr data-mce-fragment=\"1\"\u003eहिंदी फिल्मों के लिए लिखे उनके गानों में भी उनका व्यक्तित्व झलकता है। उनके गीतों में संजीदगी कुछ इस तरह झलकती है जैसे ये उनके जीवन से जुड़े हों। \u003cbr data-mce-fragment=\"1\"\u003eवक्त के कागज़ पर अपने जमाने की दास्तान लिखने वाले साहिर ने ताउम्र अपनी तमाम रचनाओं में आधी आबादी के पूरे हक और इज्जत की नुमाइंदगी की। स्त्रियों को लेकर उनकी रचना दृष्टि का फलक बहुत ही व्यापक दिखाई देता है। अपने गानों में कभी वे अपनी महबूबा के जमाल को लफ़्जों से बांधते नजर आते हैं, कभी ‘मेरे घर आई एक नन्ही परी’ लिख कर उस नन्ही बच्ची की सम्मोहक किलकारियां उकेरते हैं तो कभी ‘चकला’ और ‘औरत’ जैसी नज्म में उन औरतों की चीखे ढालते हैं जिन्हें समाज की पिछड़ी निगाहें सिर्फ देह के दायरों में बंधा देखने में अभिशप्त है। \u003cbr data-mce-fragment=\"1\"\u003eदुनिया ने तजुर्बात-ओ-हवादिस की शकल में \u003cbr data-mce-fragment=\"1\"\u003eजो कुछ मुझे दिया है वोह लौटा रहा हूँ मैं\u003c\/span\u003e","brand":"Sai Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":44128502776100,"sku":"572e074a-3f94-4888-bb0f-ad7d3ce46410","price":140.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0671\/3661\/8788\/products\/5002_front.jpg?v=1674947285","url":"https:\/\/bookstation.in\/products\/572e074a-3f94-4888-bb0f-ad7d3ce46410","provider":"BookStation","version":"1.0","type":"link"}