{"product_id":"9780143458333","title":"Zindagi Unlimited","description":"\u003cp\u003eआख़िर क्यों हम अपने आप को परिस्थितियों में अटका हुआ पाते हैं?\n\u003cbr\u003eआख़िर क्यों कुछ लोग हर तरह की सीमाओं को तोड़ पाते हैं?\n\u003cbr\u003eआख़िर कैसे दायरों को तोड़ कर हासिल होती है एक असीमित ज़िंदगी?\n\u003cbr\u003eइस पुस्तक में इन सवालों के जवाब समाहित हैं। यह पुस्तक, लेखक गौरव उपाध्याय पंद्रह वर्षों के अंतर्राष्ट्रीय कैरियर के अनुभव, 1000 से ज़्यादा लोगों से साक्षात्कार, सोशल मीडिया के ज़रिए जुड़े लाखों लोगों से सीखे गए सबक और जीवन के कई पहलुओं को नए नज़रिए से देखने की एक कोशिश का सार है।\n\u003cbr\u003eखुद को बेहतर तरीके से जानने से लेकर अपनी नई कहानी लिखने तक, आप सीखेंगे की जीवन को कैसे आसान बनाया जाए? कैसे अपने माइंड-सेट को बदलकर नए जीवन की संकल्पना कैसे करें? दुख और पीड़ा को गले लगाकर खुद को नया जीवन कैसे दिया दें? समय की सीमाओं को कैसे समझें और टाइम-मैनेजमेंट को नए दृष्टिकोण से कैसे देखें?\n\u003cbr\u003eइस पुस्तक में आपको वास्तविक जीवन से व्यावहारिक उदाहरण और दिल को छू लेने वाली सच्ची कहानियों के संदर्भ मिलेंगे। इस किताब के साथ आप खुद से भी संवाद कर सकेंगे। ज़िंदगी अनलिमिटेड आसमान से भी ऊँची उड़ान भरने के आपके प्रयास में आपकी मार्गदर्शक है और आपकी सबसे अच्छी दोस्त भी।\u003c\/p\u003e","brand":"Sai Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":47757402865956,"sku":"9780143458333","price":199.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0671\/3661\/8788\/files\/9780143458333.jpg?v=1703245962","url":"https:\/\/bookstation.in\/products\/9780143458333","provider":"BookStation","version":"1.0","type":"link"}