{"product_id":"9789389143546","title":"Daag","description":"\u003cp\u003eउर्दू शायरी के इतिहास में एक से बढ़कर एक शाइर हुए हैं, जिनकी शख़्सियत या जिनका कलाम किस परिचय का मुहताज नहीं है। उर्दू शाइरी में जिन शाइरों का नाम आज भी सम्मान के साथ लिया जाता है, उनमें 'दाग़ देहलवी' का अपना स्थान है।\n\u003cbr\u003eमेरे तक़ी 'मीर' और उनके बाद 'मेमिन', 'ज़ौक', 'ग़ालिब' और इन्हीं के साथ 'दाग़' का ऐसा नाम है, जिस पर उर्दू अदब नाज़ कर सकता है, यह बात गलत नहीं है।\n\u003cbr\u003e'दाग़' की शायरी के बारे में यही कहा जा सकता है कि यदि उनकी शाइरी का हुस्न उनकी ज़बान और उनके अंदाज़े बयान में है। इश्क़ कि वारदातें उनका सबसे प्रिय विषय है। इस बात का प्रमाण उनके ये शे'र हैं -\n\u003cbr\u003eमौत का मुझको न खटका, शबे-हिज्रां होता।\n\u003cbr\u003eमेरे दरवाज़े अगर आपका दरबां होता।।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003eख़याले यार ये कहता है मुझसे ख़िलवत में।\n\u003cbr\u003eतेरा रफ़ीक़ बता और कौन है, मैं हूँ।।\u003c\/p\u003e\n\n\u003cp\u003e'दाग़ देहलवी' एक उच्च कोटि के शाइर थे, जिनका कलाम उर्दू अदब के लिए किसी रौशनी मीनार से काम नहीं है। दिल्ली कि ख़ास ज़बान और अपने अशआर के चुटीलेपन के कारण 'दाग़' को भारतीय शाइरों कि पहली पंक्ति में गिना जाता है। सीमाब अकबराबादी, जोश मलिसयानी, डॉक्टर इक़बाल, आग़ा शाइर बेख़ुद देहलवी तथा एहसान मारहवी जैसे उस्ताद शाइर मूलतः 'दाग़' के ही शिष्य थे। उस्ताद 'दाग़' का एक मशहूर शे'र इस प्रकार है-\n\u003cbr\u003eतुम्हारी बज़्म में देखा न हमने दाग़-सा कोई।\n\u003cbr\u003eजो सौ आये, तो क्या आये, हज़ार आये, तो क्या आये।।\u003c\/p\u003e","brand":"Sai Books","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":47752709636388,"sku":"9789389143546","price":199.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0671\/3661\/8788\/files\/daag_final_cover_artwork-1.jpg?v=1703166379","url":"https:\/\/bookstation.in\/products\/9789389143546","provider":"BookStation","version":"1.0","type":"link"}