Product Description
एक प्रतिष्ठित परिवार की सदस्या एक ऐसी महिला की कहानी जो कदम कदम पर झूठ बोलती थी जिसे अपने हितैषी और मददगार सुनील से भी झूठ बोलने से कोई गुरेज नहीं था जिसकी बाबत जिद करने लगी थी कि उसने जिस शख्स को गोली चलने के बाद मौकाएवारदात से भागते देखा था वो सुनील था। झूठी औरत नया, परिवर्धित संस्करण! मूल कथानक से बिल्कुल जुदा! जिसे लेखक ने शुरू से आखिर तक फिर से लिखा।
*Scanned images shown above are directly captured from the store. Fulfillment of products subject to availability *
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एक प्रतिष्ठित परिवार की सदस्या एक ऐसी महिला की कहानी जो कदम कदम पर झूठ बोलती थी जिसे अपने हितैषी और मददगार सुनील से भी झूठ बोलने से कोई गुरेज नहीं था जिसकी बाबत जिद करने लगी थी कि उसने जिस शख्स को गोली चलने के बाद मौकाएवारदात से भागते देखा था वो सुनील था। झूठी औरत नया, परिवर्धित संस्करण! मूल कथानक से बिल्कुल जुदा! जिसे लेखक ने शुरू से आखिर तक फिर से लिखा।
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